परिचय
- ‘स्वर’ शब्द में वर्णों की संख्या 5 है। जैसे– स् + व् + अ + र् + अ
- यह संधि का भेद है।
- इस संधि में स्वर का स्वर के साथ मेल होता है।
- स्वर 11 एवं उनकी मात्राएँ 10 होती हैं। जैसे–
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्वर (11) | अ | आ | इ | ई | उ | ऊ | ऋ | ए | ऐ | ओ | औ |
| मात्राएँ (10) | कोई मात्रा नहीं | ा | ि | ी | ु | ू | ृ | े | ै | ो | ौ |
स्वर संधि की परिभाषा :–
- परस्पर स्वर का स्वर के साथ मेल होने पर जो विकार उत्पन्न होता है उसे स्वर संधि कहते हैं। अर्थात् दो स्वरों के मेल से होने वाले विकार (परिवर्तन) को ही स्वर संधि कहते हैं।
- अथवा
- पूर्व पद का अंतिम वर्ण तथा उत्तर पद का प्रथम वर्ण दोनों ही स्वर हो तो वहाँ स्वर संधि होती है। जैसे–
| संधि विच्छेद | शब्द |
|---|---|
| देव + आलय | देवालय |
| रमा + ईश | रमेश |
| भौ + उक | भावुक |
| एक + एक | एकैक |
| विद्या + आलय | विद्यालय |
| यदि + अपि | यद्यपि (यद् यपि) |
स्वर संधि के भेद
- स्वर सन्धि के पाँच भेद है। जैसे-
| क्र. सं. | स्वर संधि के भेद |
|---|---|
| 1 | दीर्घ स्वर संधि |
| 2 | गुण स्वर संधि |
| 3 | वृद्धि स्वर संधि |
| 4 | यण् संधि |
| 5 | अयादि संधि |
विशेष :–
- दीर्घ स्वर संधि, गुण स्वर संधि एवं वृद्धि स्वर संधि में स्वर का स्वर के साथ मेल होता है तथा उत्पन्न विकार भी स्वर होता है। अर्थात् स्वर के स्थान पर स्वर ही लिखते हैं। इसलिए इन तीनों संधियों के नाम के साथ स्वर शब्द लिखा गया है।
- यण् संधि तथा अयादि संधि में स्वर का स्वर के साथ मेल तो होता है परन्तु उत्पन्न विकार स्वर नहीं होता है। अर्थात् स्वर के स्थान पर स्वर नहीं लिखते हैं। इसलिए इन दोनों संधियों के नाम के साथ स्वर शब्द नहीं लिखा गया है।
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